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भारतीय जवान की होती है ये खुराक आप कर सकते है शामिल अपने खाने में

जब भी हम किसी चुस्त और दुरस्त भारतीय आर्मी जवान को देखते है तो सबसे पहला सवाल हमारे मन मे ये आता है कि आखिर कर इनकी खुराक क्या होती है जिसके कारण ये इतने फिट और जोशीले रहते है. तो आइए जानते हैं इस आर्मी डे पर आर्मी और मिल‍िट्री के जवानों की डाइट के बारे में।अक्‍सर आपने तस्‍वीरों या टीवी पर देखा होगा कि जंग पर जाते हुए भारतीय सैन‍िक पीठ पर घोड़े की तरह पानी की थैली और एक बैग बंधी हुई होती हैं। दरअसल पीठ पर बैठने के लिए जो गद्दी हुआ करती थी, उसमें अनाज होता था। लड़ाई पर लंबे समय दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाले सैन‍िक शरीर की ऊर्जा व चुस्ती-फुर्ती बनाए रखने के लिए भूख लगने पर रागी और मकई की रोटी खाया करते थे।

वो इसलिए कि इसमें स्टार्च, फाइबर और आयरन अधिक मात्रा में होता है। भारतीय जवान देसी चना भी खूब खाते थे कि इसे खाने से उन्हें प्रोटीन मिलता था। साथ ही भारतीय जवान के खाने मे तेल की मात्रा ना के बराबर होती है.क्योंकि पहले शक्‍कर आसानी से नहीं मिल पाता था, तो भारतीय जवान खाने को मीठा करने के लिए गुड़ या गन्ने के गाढ़े रस का उपयोग करते थे। वे किसी भी सब्जी को पूरा नहीं पकाते थे क्योंकि ज्यादा पकाने पर उनकी पौष्टिकता नष्ट होती है और समय भी अधिक लगता है। भारतीय जवान अपने साथ मूंगफली के दाने और गुड़ के लड्‌डू भी रखते थे और बीच में भूख लगने पर यही खा लेते थे।

साथ ही ऐसी डिश हम आपको बताने जा रे ही है जोकि आप भारतीय आर्मी जवान की तरह अपने खाने मे शामिल कर सकते है और उनकी तरह फिट भी रह सकते है.मीठी डिश है। चावल को पकाने के बाद पीसते हैं, गुड़ डालते हैं और लोई बनाकर रखते हैं। गेहूं के आटे की रोटी बनाते हैं, उसमें चावल और गुड़ की लोई भरके बंद कर देते हैं। भरावन वाली लोई की रोटी बनाते हैं और इसे पराठे की तरह सेंकते हैं और गरम-गरम खाते हैं।चावल पीसकर उबालते हैं। फिर इसमें नमक डालकर मटके में रखते हैं। कुछ घंटों बाद जब खमीर उठता है, तब खाते हैं। भारतीय सैनिक इसे अपने साथ बांधकर ले जाते थे। क्योंकि यह फर्मेंटेड होता है इसलिए खाने के बाद मामूली-सा नशा होता है। ये एक तरह का संतुल‍ित डाइट हैं।

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